दोस्तों जेएनयू जो की देश और दुनिया को लोकशाही का पाठ सिखाते हे वह अपने ही विश्वविद्यालय के छात्रो को ठीक से लोकशाही का पाठ नहीं पढ़ा पाए हे, ऐसा भी कहना उचित होगा की जेएनयू छात्रसंघ चुनाव में लोकशाही की हत्या हुई हे. हाल ही में हुए जेएनयू छात्रसंघ चुनाव में सिर्फ 59 फीसदी मतदान हुआ था जो की रिकॉर्ड ब्रेक था. पिछले साल 2015 के जेएनयू छात्रसंघ चुनाव में 53.3 फीसदी मतदान हुआ था. पिछले साल की तुलना में सिर्फ 6 फीसदी की बढोती हुई हे. जेएनयू में करीबन 8500 छात्र हे उसमे से सिर्फ 5000 छात्र ही चुनाव में अपना वोट डालते हे और करीबन 3500 छात्र चुनाव का हिस्सा नहीं बनते हे. यह लोकशाही की हत्या नहीं तोऔर क्या हे? धन्यवाद् तो गावो की उन गरीब जनता को देना चाहिए जहा पंचायती के चुनाव में हमेशा 90 फीसदी से ज्यादा मतदान होता हे, जब की उनकी सिक्षा का स्तर बहोत कम हे और वह कम शिक्षित हे. दोस्तों जेएनयू में हमेशा से वामपंथियो का दबदबा रहा हे और आप देख सकते हे किसप्रकार का लोकशाही का मॉडल उन्होंने पेश किआ हे. जेएनयू छात्रसंघ चुनाव के परिणाम से यह सामने आया हे की ABVP को 24 फीसदी वोट मिला हे और वह Single Largest Party बनके उभरी हे. इससे आप अंदाजा लगा सकते हे की सारे वामपंथी संगठन को कितना फीसदी वोट मिला होगा. आपने ही गढ़ में जित का जश्न मानाने वाले वामपंथियो को सोचना चाहिए की 3500 छात्रों (करीबन 41%) ने तो उन्हें चुनाव से पहले ही रिजेक्ट करदिया था. और जहातक ABVP की बात हे आप सभी को पता ही हे की देशभर में हुए छात्रसंघ चुनाव में 70% से ज्यादा चुनाव ABVP ने जीता हे. जिससे साबित होता हे की छात्रशक्ति का बहोत बड़ा हिस्सा ABVP के साथ हे. इसलिए वामपंथियो को मेरी नम्र विनंती हे की ABVP की चिता जलाने से पहले सो बार सोचे और इन तथ्यों पे विचार करे. भगवान जेएनयू के छात्रो को इन वामपंथियो से और उनकी गंदकी (जो की उनकी जित के जश्न से ही सुरु हो चुकी हे) से बचने की शक्ति प्रदान करे
छात्रशक्ति राष्ट्रशक्ति
भारत माता की जय
छात्रशक्ति राष्ट्रशक्ति
भारत माता की जय