Monday, August 29, 2016

दिने में क्रांतकारी, और रात में बलात्कारी, यह हे वामपंथिओ की असली रियलिटी

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में हाल ही में वामपंथी छात्र संगठन AISA/आइसा के सदस्य द्वारा एक  छात्रा पर बलात्कार की घटना सामने आई हे. हलाकि ये घटना नयी नहीं हे, वामपंथी छात्र संगठन के लिए ऐसी घटनाये सामान्य हे. अगर आप AISA की हिस्ट्री देखेंगे तो आपको पता चलेगा की वामपंथी छात्र और कई वामपंथी प्रोफेसरों भी ऐसी घटना करते रहे हे. ऐसे कई अनमोल (बलात्कारि) रतन वामपंथी छात्र संगठन में हे. AISA/आइसा के पूर्व सदस्य एवम जेएनयू छात्रसंघ के अध्यक्ष अकबर ने भी एक छात्रा का यौनशोषण किया था. आइसा के पूर्व सदस्य एवम जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व सेक्रेटरी पे भी यौनशोषण का मामला दर्ज हुआ हे. वामपंथी प्रोफेसर अरशद आलम (स्कूल ऑफ़ सोशल साइंस) एवम गंगा सहाय मीणा (स्कूल ऑफ़ लैंग्वेज) पर भी शोधार्थी छात्रा के साथ यौनशोषण के मामले दर्ज हुए हे. यह सभी AISA के सदस्य हे. UGC के डाटा के हिसाब से साल २०१३ और २०१४ में सिर्फ जेएनयू में यौनशोषण २५ मामले सामने आये हे. दिल्ही महिला आयोग के आंकड़ो के मुताबिक साल २०१३ और २०१५ के बिच दिल्ही के अलग अलग विश्वविद्यालयो में यौनशोषण के जितने मामले सामने आये उनमे से ५०% सिर्फ जेएनयू में ही हुए हे. देश के उच्च विद्यालयो में भी यौनशोषण के सबसे ज्यादा मामले जेएनयू में ही दर्ज हुए  हे? अब सबसे बड़ा सवाल यह हे की सिर्फ जेएनयू में ही यौनशोषण के सबसे ज्यादा मामले क्यू सामने आते हे? यह इसलिए की वहा वामपंथिओ का दबदबा हे? या फिर वामपंथिओ की विचारसरणी एवम कार्यशैली ही ऐसी हे? आजादी की आड़ में यह वामपंथि कोई भी हद पर सकते हे, कितना भी गिर सकते हे. इनके ये बलात्कारी रतन इतना गिर चूका की छात्रा को नसीला शराब पिला के बलात्कार करने के बाद उसको जानसे मारने की धमकी देता हे. सुन ने में आ रहा हे की पीड़ित छात्रा दलित थी? वामपंथिओ क्या यही आपकी दलितों के लिए लड़ाई हे??? क्या यही वामपंथिओ का महिला सशक्तिकरण हे? पीड़ित छात्रा की हिम्मत की दाद देनी चाहिए उसने धमकी मिलने के बावजूद पुलिस थाने में मामला दर्ज करके बहादुरी पूर्ण कर्तव्य किआ हे. जरा सोचिए पीडिता ने पुलिस थाने में मामला दर्ज क्यू करवाया? इन वामपंथिओ का कितना खौफ होगा? अरे कन्हैया कुमार आपके पास गुजरात, महाराष्ट्र, बिहार केरल......हर जगह जाने का समय हे लेकिन आपके ही हॉस्टल (ब्रह्मपुत्रा) में यह बलात्कार हुआ हे, और तबसे आप वहा नहीं गए हे, ऐसा क्यू? अरे वामपंथिओ क्या यही आपकी आजादी हे? क्या यही आपकी छात्र राजनीती हे? क्या यही वामपंथिओ का महिला सशक्तिकरण हे? क्यों कोई भी वामपंथि संगठन ने पीडिता के न्याय के लिए कोई मार्च नहीं निकला, क्यों कोई धरना प्रदर्शन नहीं हुआ? कहा घुस गई आपकी आजादी??? अरे देशवासियों यही वामपंथिओ का असली चहेरा हे. उनकी करनी और कथनी में बहोत फर्क हे.           
ये दिने में क्रांतकारी, औए रात में बलात्कारी, बन जाते हे. यह हे वामपंथिओ की असली रियलिटी
अरे सुनलो जरा वामपंथिओ,
तुम जिनते बलात्कारी पैदा करोगे, हम उतने बलात्कारी को सजा दिलवाएंगे.

Down Down With Lal Salam

Thursday, August 25, 2016

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार के लिए कुछ सवाल

कन्हैया कुमार के लिए कुछ सवाल
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष, कन्हैया कुमार, हाल ही में, गुजरात, महाराष्ट्र, बिहार केरल......हर जगह जाके, हर एक बात पर,जोर जोर से आजादी आजादी चिल्लाते हुए नजर आये हे. मगर यही कन्हैया कुमार र जेएनयू में ही एक छात्रा के साथ हुए बलात्कार के मामले पे चुप क्यो हे? क्या कन्हैया कुमार को बलात्कार और बलात्कारियो से आज़ादी नहीं चाहिए? आप की चुपकी का क्या मतलब समजा जाये? क्या आप ऐसी घटनाओ का समर्थन करते हे? आगर नहीं तो फिर इस मामले पर धरना प्रदर्शन, भूख हड़ताल तो होना ही चाहिए था, अरे इतना कुछ नहीं करसकते तो कमसेकम एकबार आजादी वाला नारा तो लगा ही सकते थे. भारत के टुकड़े करवाने में तो आपको बड़ा मजा आ रहा था, पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने में भी आपको बड़ा मजा आ रहा था, भारत की सर्वोच्च न्यायालय के खिलाफ भी बहोत चिल्लाये थे, कश्मीर की आजादी के लिए भी बहोत चिल्लाये थे, अरे आपने तो इंडियन आर्मी को भी रेपिस्ट बोल दिया था, मगर ईस सही, असल बलात्कारी के मामले पे चुप रहने की वजह क्या हे? क्या आपका ये रतन इतना अनमोल हे की आप और आप के सभी साथियो ने मौन व्रत धारण कर लिया हे? अरे में तो भूल ही गया ये बलात्कारी (अनमोल) रतन आपके ही परिवार (राजनैतिक) वामपंथी छात्र संगठन आइसा का ही सदस्य है. क्या ऐसी शर्मनाक घटनाओ से जेएनयू बदनाम नहीं हो रहा हे? क्या सिर्फ आपके प्यारे रतन की सदस्यता खत्म कर देने से से पीड़ित छात्रा को न्याय मिलजायेगा? यह मामले पर सारे वामपंथी छात्र संगठन रास्तो पे क्यों नहीं उतरे? चाहे वामपंथी छात्र संगठन पीड़ित छात्रा का साथ दे या ना दे, ईस देश का हर एक छात्र एवम छात्रा पीड़ित छात्रा के साथ हे.
कन्हैया कुमार, हो सके तो इन सवालो का जवाब देने की कोशिश कीजियेगा