जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में हाल ही में वामपंथी
छात्र संगठन AISA/आइसा के सदस्य द्वारा एक छात्रा पर बलात्कार की घटना सामने आई हे. हलाकि ये
घटना नयी नहीं हे, वामपंथी छात्र संगठन के लिए ऐसी
घटनाये सामान्य हे. अगर आप AISA की हिस्ट्री देखेंगे तो आपको पता चलेगा की वामपंथी
छात्र और कई वामपंथी प्रोफेसरों भी ऐसी घटना करते रहे हे. ऐसे कई अनमोल (बलात्कारि) रतन वामपंथी छात्र संगठन में हे. AISA/आइसा के पूर्व सदस्य
एवम जेएनयू छात्रसंघ के अध्यक्ष अकबर ने भी एक छात्रा का यौनशोषण किया था. आइसा के पूर्व सदस्य एवम जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व
सेक्रेटरी पे भी यौनशोषण का मामला दर्ज हुआ हे. वामपंथी
प्रोफेसर अरशद आलम (स्कूल ऑफ़ सोशल साइंस) एवम गंगा सहाय मीणा (स्कूल ऑफ़ लैंग्वेज) पर
भी शोधार्थी छात्रा के साथ यौनशोषण के मामले दर्ज हुए हे. यह सभी AISA के
सदस्य हे. UGC के डाटा के हिसाब से साल २०१३ और २०१४ में सिर्फ जेएनयू में यौनशोषण २५ मामले सामने आये हे. दिल्ही महिला आयोग के आंकड़ो के मुताबिक साल
२०१३ और २०१५ के बिच दिल्ही के अलग अलग विश्वविद्यालयो
में यौनशोषण के जितने मामले सामने आये उनमे से ५०% सिर्फ जेएनयू में ही हुए हे. देश के उच्च विद्यालयो में भी
यौनशोषण के सबसे ज्यादा मामले जेएनयू में ही दर्ज हुए
हे? अब सबसे बड़ा सवाल यह हे की सिर्फ
जेएनयू में ही यौनशोषण के सबसे ज्यादा मामले
क्यू सामने आते हे? यह इसलिए की वहा वामपंथिओ का
दबदबा हे? या फिर वामपंथिओ की विचारसरणी एवम कार्यशैली ही ऐसी हे? आजादी की आड़ में
यह वामपंथि कोई भी हद पर सकते हे, कितना भी गिर सकते हे. इनके ये बलात्कारी
रतन इतना गिर चूका की छात्रा को नसीला शराब पिला के
बलात्कार करने के बाद उसको जानसे मारने की धमकी देता हे. सुन ने में आ रहा हे की
पीड़ित छात्रा दलित थी? वामपंथिओ क्या यही आपकी दलितों के लिए लड़ाई हे??? क्या यही
वामपंथिओ का महिला सशक्तिकरण हे? पीड़ित छात्रा की हिम्मत की दाद देनी चाहिए उसने
धमकी मिलने के बावजूद पुलिस थाने में मामला दर्ज करके बहादुरी पूर्ण कर्तव्य किआ
हे. जरा सोचिए पीडिता ने पुलिस थाने में मामला दर्ज क्यू करवाया? इन वामपंथिओ का कितना
खौफ होगा? अरे कन्हैया कुमार आपके पास गुजरात, महाराष्ट्र, बिहार
केरल......हर जगह जाने का समय हे लेकिन आपके ही हॉस्टल (ब्रह्मपुत्रा) में यह
बलात्कार हुआ हे, और तबसे आप वहा नहीं गए हे, ऐसा क्यू? अरे वामपंथिओ क्या यही आपकी आजादी हे? क्या यही आपकी छात्र
राजनीती हे? क्या यही वामपंथिओ का महिला सशक्तिकरण हे? क्यों कोई भी वामपंथि संगठन
ने पीडिता के न्याय के लिए कोई मार्च नहीं निकला, क्यों कोई धरना प्रदर्शन नहीं
हुआ? कहा घुस गई आपकी आजादी??? अरे देशवासियों यही वामपंथिओ का असली चहेरा हे. उनकी
करनी और कथनी में बहोत फर्क हे.
ये दिने में क्रांतकारी, औए रात में
बलात्कारी, बन जाते हे. यह हे वामपंथिओ की असली रियलिटी
अरे सुनलो जरा वामपंथिओ,
तुम जिनते बलात्कारी पैदा करोगे, हम उतने
बलात्कारी को सजा दिलवाएंगे.
Down Down With Lal Salam
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